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<dc:title>भारतीय ज्ञान परंपरा और नैतिक शिक्षाः शिक्षाशास्त्रीय विश्लेषण</dc:title>

<dc:creator>Author</dc:creator>

<dc:subject>भारतीय ज्ञान परंपरा, नैतिक शिक्षा, शिक्षाशास्त्र, गुरु-शिष्य परंपरा, भारतीय दर्शन, सामाजिक मूल्य, शैक्षिक नीति, आधुनिक शिक्षा प्रणाली, नैतिकता।</dc:subject>

<dc:description>भारतीय ज्ञान परंपरा विश्व की प्राचीनतम एवं समृद्ध बौद्धिक परंपराओं में से एक है, जो केवल ज्ञान के
संकलन तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन मूल्यों और नैतिक शिक्षा के गहरे सिद्धांतों से परिपूर्ण है। नैतिक शिक्षा
का उद्देश्य व्यक्ति में उच्च आदर्शों, सामाजिक उत्तरदायित्व, एवं आध्यात्मिक चेतना का विकास करना है। भारतीय
शिक्षाशास्त्र में नैतिकता को शिक्षा का अनिवार्य अंग माना गया है, जिसमें वेद, उपनिषद, महाभारत, रामायण,
गीता, पंचतंत्र एवं हितोपदेश जैसे प्राचीन ग्रंथ नैतिक शिक्षा के मूलभूत स्रोत रहे हैं। गुरुकुल प्रणाली में गुरु-शिष्य
परंपरा के माध्यम से न केवल शैक्षिक ज्ञान बल्कि नैतिक मूल्यों, अनुशासन, सत्य, अहिंसा एवं कर्तव्यपरायणता
का शिक्षण दिया जाता था। बौद्ध एवं जैन परंपराओं में भी नैतिक शिक्षा का विशेष स्थान था, जहाँ अहिंसा, सत्य
और अपरिग्रह को जीवन का आधार माना गया। आधुनिक शिक्षा प्रणाली में नैतिक शिक्षा का स्थान कम होता
जा रहा है, जिससे समाज में नैतिक पतन, अनुशासनहीनता एवं मूल्यों की गिरावट जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो
रही हैं। नई शिक्षा नीति 2020 ने भारतीय ज्ञान परंपरा को पुनर्जीवित करने एवं नैतिक शिक्षा को शिक्षा प्रणाली
में समाहित करने पर बल दिया है। नीति में भारतीय भाषाओं, योग, नैतिक मूल्यों एवं पारंपरिक ज्ञान के महत्व
को स्वीकार किया गया है। डिजिटल युग में नैतिक शिक्षा को प्रभावी बनाने के लिए पारंपरिक शिक्षण विधियों
के साथ आधुनिक तकनीकी साधनों का उपयोग आवश्यक है। नैतिक शिक्षा केवल विद्यालयों तक सीमित न
रहकर पारिवारिक एवं सामाजिक परिवेश का भी हिस्सा बननी चाहिए। इसके लिए पाठ्यक्रम में नैतिकता से
संबंधित विषयों को प्राथमिकता देना, शिक्षकों की भूमिका को सुदृढ़ बनाना तथा विद्यार्थियों को व्यावहारिक नैतिक
प्रशिक्षण देना आवश्यक है। भारतीय ज्ञान परंपरा के माध्यम से नैतिक शिक्षा को प्रभावी रूप से लागू किया जा
सकता है, जिससे एक संतुलित एवं मूल्यों पर आधारित समाज की स्थापना संभव होगी।</dc:description>

<dc:publisher>International Journal of Arts, Humanities, Social Sciences and Commerce</dc:publisher>

<dc:date>2026-01-06</dc:date>

<dc:type>Text</dc:type>

<dc:format>application/pdf</dc:format>

<dc:identifier>10.65919/ijahssc.2026.v2i1001</dc:identifier>

<dc:language>en</dc:language>

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