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            <article-id pub-id-type="doi">
                10.65919/uimrj.2025.v1i2001            </article-id>

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                <article-title>
                    महासमुंद जिले में ग्रामीण प्रशासन एवं पंचायती राज व्यवस्था का तुलनात्मक अध्ययन                </article-title>
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            <abstract>
                <p>भारत में गाँवों का शासन दो अलग ढाँचों पर चलता है। एक ढाँचा तहसील पर आधारित राजस्व प्रशासन है। दूसरा ढाँचा 73वें संविधान संशोधन से सशक्त हुई पंचायती राज संस्थाएँ हैं। यह अध्ययन छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में इन दोनों ढाँचों की पहुँच और संतुलन को परखता है। अध्ययन के दो उद्देश्य हैं। पहला, विकासखंड स्तर पर ग्रामों और ग्राम पंचायतों के वितरण को ग्रामीण परिवारों की संख्या से मिलाकर देखना। दूसरा, महिला-मुखिया परिवारों में विकासखंड-वार अंतर की जाँच करना। अध्ययन वर्णनात्मक-तुलनात्मक प्रारूप पर आधारित है। इसमें जनगणना 2011, सामाजिक-आर्थिक एवं जाति जनगणना (SECC) 2011 और आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण 2023-24 के द्वितीयक आँकड़े लिए गए। दो शून्य परिकल्पनाओं की जाँच काई-वर्ग परीक्षण और क्रेमर V से हुई। जिले की 88.37 प्रतिशत जनसंख्या ग्रामीण है। जिले की 544 ग्राम पंचायतें 1,145 ग्रामों को समेटती हैं। ग्राम पंचायतों का वितरण ग्रामीण परिवारों के अनुपात से मेल खाता है (χ² = 0.83, p = 0.935)। इसके उलट, महिला-मुखिया परिवारों का अनुपात विकासखंडों में सार्थक रूप से अलग है (χ² = 327.25, p &lt; 0.001)। इससे पता चलता है कि ढाँचे का संतुलन मौजूद है, पर सामाजिक संरचना हर विकासखंड की पंचायतों पर अलग-अलग दबाव डालती है। निष्कर्ष यह है कि एक जैसा ढाँचा काफी नहीं है। हर विकासखंड के लिए अलग नियोजन ज़रूरी है।</p>
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